पक्षधर

सुबह पीपल पर मत्था टेकना
शाम को दो पैग लेकर 
कविताओं को घोर क्रांतिकारी बनाने के लिए
‘तुम्हारा ईश्वर’ ‘ तुम्हारा ईश्वर’ कहकर 
नास्तिक होने का ढोंग करना 

हम उन कवियों से हारे जिनका स्त्री विमर्श 
हस्तमैथुन के बाद उपजे ज्ञान से जागता है 

निराश लोमडियों के लिए भेजी गई 
अंगूरों की शुभकामनाओं में दर्ज हुए 
वे ऐसे क्रांतिकारी आलोचक थे
जो विषमता से कम 
बौद्धिकता के अतिवाद से ज्यादा पीड़ित रहे 

कोई समझाओ मुझे 
जो मार्क्स का नही वह हिटलर का कैसे हुआ 
गांधी की राह को क्या सजा दोगे निर्णायकों

सबकी पक्षधरता निर्धारित करने वालों सुनो 
धर्मभीरू और दंगाई में फर्क अच्छे से जानता हूं
सांप्रदायिकता के खिलाफ उठाई गई मुट्ठी से 
आस्तिक मन के कोमल भाव मुझसे कुचले न जायेंगे 
सौ बात की एक बात
मेरी मनुष्यता तुम्हारे तवे की चपाती नहीं
कविता पक्षधर होती है पक्षपाती नहीं 


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