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ज्योतिबा और अंबेडकर के सपनों के शिक्षक–शिक्षिकाएं कैसे हों? jyotiba ambedekar education

ज्योतिबा और अंबेडकर के सपनों के शिक्षक–शिक्षिकाएं कैसे हों?

बदलते समय के साथ अध्यापक–अध्यापिका के कार्य में निरंतर बदलाव आए हैं। उनकी सामाजिक मान्यताओं और धारणाओं में भी परिवर्तन…

‘पहल’ की चेतना एवं ज्ञानरंजन का साहित्यिक संघर्ष gyanranjan

‘पहल’ की चेतना एवं ज्ञानरंजन का साहित्यिक संघर्ष

 ज्ञानरंजन आधुनिक हिंदी साहित्य के उन शीर्षस्थ लेखकों में से हैं, जिन्होंने ‘नई कहानी’ आंदोलन के बाद हिंदी लघु कथा…

टुसू : कृषि संस्कृति, नारी शक्ति एवं लोक-आस्था का पर्व tusu

टुसू : कृषि संस्कृति, नारी शक्ति एवं लोक-आस्था का पर्व

टुसू पर्व पूर्वी भारत के झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ हिस्सों तथा असम के चाय बागानों में मनाया…

आज के शब्द

मुक्तिबोध

अब अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे
उठाने ही होंगे।
तोड़ने ही होंगे मठ और गढ़ सब।

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