बहुत दूर तलक छाई कोहरे की धुंध में
सरों पर चारा लेकर लौटतीं हैं
और दूसरी तरफ के बादलों में उतर जाती हैं
वे इतनी तेज चलती हैं कि पीछे छूट गये बच्चे उनसे
अपने लिए गन्ना लेने की जिद के बजाय
साथ चलने की जिद करते हैं
और ताकतें रहते हैं माँओं के चेहरे
उनकी साड़ियां बादलों के ऱंग की हैं
और उनके चेहरे
भीड़ में दूर से पहचानें जाने वाले रंगों के
वे इतनी सुबह उठती हैं
कि घास के साथ चोरी कर सकें
चने का साग, मटर की फलियां
और तरकारी के दो आलू
रखवाला जल्दी उठता है तो वो और पहले उठती हैं
रखवाले कहते हैं-
इस गांव में कोई फसल जवान नहीं होती
बादलों के रंग की साड़ी पहने ये औरतें
उतरती है नीम अंधेरे में
और चट कर जाती हैं
वह सबकुछ जिनसे ये महरूम हैं
बादलों के रंग की साड़ी पहने
एक दिन मेरी मां छत से चिल्लाती है
पराये गांव का आदमी
तुम्हारे मर्दों पर बेल्ट चला रहा है
तुम चोरियां करती हो वो डकैती कर रहा है
औरतों का एक हुजूम निकलता है
शांत खड़े आदमियों को बाजू से पकड़कर पीछे करता है
और चारा काटने की रोइया पर गिरा लेता है
उस आदमी का सर
उठा हुआ गड़ासा उनके सर के ऊपर है
उसकी भीख मांगती आंखों का
और औरतों का फासला बहुत कम है
अपने मर्दों को इन हैवानों से बचा कर लाती
मेरे गांव की औरतों के चेहरे और साड़ियां
बादलों के एक खास रंग से बनी हैं
और उनके हाथों में काटने का हुनर है
मैं जब भी किसी औरत को
मर्द के आगे खड़े होकर लड़ते देखती हूं
मुझे बादलों के रंग वाली
अपने गांव की औरतों की याद आती है
और रोइयां पर भीख मांगता
उस आदमी का हिलता हुआ सर
वे मेरे गांव की औरतें हैं
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