मुरझाते खिलते रहते हो

मुरझाते खिलते रहते हो
किस पल में उलझे रहते हो
 
लाली धूप छांव चेहरे पर
किस रंग में घुलते रहते हो
 
आँखों में कुछ खरके है
देखा है मलते रहते हो
 
किस की राह तकी जाती है
यहां वहाँ बैठे रहते हो
 
आते जाते कहीं नहीं तुम
जब देखो चलते रहते हो

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