ज़मीनों आसमाँ कुछ भी नही है
तेरे आगे जहाँ कुछ भी नही है
मैं अपने दुःख बताना चाहता हूँ
मगर होता बयाँ कुछ भी नही है
बिछड़ते वक्त उसने ये कहा था
हमारे दरमियाँ कुछ भी नही है
अकेलेपन ने उसको मार डाला
ये रस्सी के निशाँ कुछ भी नही है
दुआ में वक़्त मत बरबाद करना
ख़ुदा जैसा यहाँ कुछ भी नही है।
