तुम्हारी आँखों में

तुम्हारी आँखें 
वो नाव बन गयी हैं जिसमें बैठ कर 
एक झील अपनी ही सैर पर निकलती है 
और मैं रात के इस वक़्त 
नाव के किनारे खड़ी साक्षी हूँ इसकी
 
तुम्हारी आँखों में मैंने देखा
उस झील को मुस्कुराते हुए 
और देखा उसके साथ चाँद को भी उसी नाव पर। 
चाँद बार-बार झील में डूबता, निकलता… खेलता है 
और झील रात भर मुस्कुराती है तुम्हारी आँखों में। 

तुम रात-रात जाग रहे हो,
जाने कबसे
अपनी आँखों में 
संसार के एक सबसे खूबसूरत दृश्य को लिए…
लेकिन आज तुम्हारी रहस्यमयी मुस्कान का अर्थ
जान रही हूँ मैं 
कि इस मुस्कान के पीछे 
एक चाँद और एक झील की कहानी है 
जो रात में तुम्हारी आँखों पर सवार होकर
अपनी सैर पर निकलते हैं
और सुबह-सुबह 
तुम मुस्कुराते हुए देखते हो मुझे इस तरह 

तो क्या तुमने देख लिया मुझे, 
रात में किनारे पर खड़ी, 
छुप-छुप कर देखते हुए तुम्हारी आँखों में


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