संगम दो अनथक

मिलन हमारा 
जैसे संगम दो अनथक आदिम यात्राओं का
तुम्हारी हथेली में 
आसमान था पूरा
मेरे पास थी केवल बात 
चाँद और सूरज की
 
चाँद जैसे कोई फल हो मीठा पेड़ पर लटकता हुआ 
और सूरज मेरे कमरे का बल्ब
 
आसमान के बिना 
कभी चाँद की कल्पना हो सकती है भला?

तुमने मुट्ठी खोली 
आसमान खुल पड़ा
मैंने अपने चाँद और सूरज 
रख दिये उसमें सबके लिए, 
साथ ही उनके नये अर्थ भी
जैसे तुमने 
अपना आसमान रख छोड़ा 
समस्त सृष्टि के लिए


4.7 3 votes
रेटिंग
guest
0 प्रतिक्रियाएँ
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x
0

Subtotal