अभी तो
हज़ार मर्तबा माफ़ करनी हैं हमें
एक–दूसरे की गलतियां
जब–जब दूर जाएंगे
महसूस करना होगा
जिस्म से जान का निकलना क्या होता है
अभी न जाने कितनी बार
गम में उदासी और खुशी में मुस्कान का हमारे मुखों पर
एक साथ दस्तक देना शेष बचा हुआ है
अभी तो एक दूसरे से दूर होने के डर से
कई बार जीते जी मर जाना है
तो कई बार साथी को बेजार रोता देख
गंभीर मरणासन्न अवस्था से भी
जी उठना है यकायक
हम जितना साथ रहेंगे
अगले ही पल
उससे अधिक साथ रहने का मोह
जगाना होगा अपने भीतर
धरती आसमान के बीच फैली दुनिया से
कहीं बड़ी और
सौरमंडल में छिपी जीवन की संभावनाओं से अधिक
सुखद आश्चयों से भरनी होगी
अपने प्रेम के कैनवास पर बसी दुनिया
अन्तिम चुंबन, अन्तिम छुअन तक बचाए रखनी होगी
पहली बार चूमने और छूने जैसी ही जादुई सिहरन
अभी कई कठिन परीक्षाओं से गुजरना है हमें
कई आजमाइशें बाकी हैं
साथ–साथ कठिनाइयों के अनगिनत पहाड़ चढ़ने हैं
लांघने हैं आग के अनंत दरिया
हमने प्रेम किया
बेहतर निभाया
ये कहने की जल्दी न करो….
प्रिय !!
रुको ! थोड़ा ठहर जाओ
एक–साथ आखिरी सफर तय कर
मृत्यु के द्वार पहुंचने में
कुछ देर बाकी है अभी…!
अभी तो
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