पाठ्यक्रम (सिलेबस)-हिन्दी (विषय कोड-01) : उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, प्रयागराज

1. हिंदी भाषा का इतिहास:

हिंदी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :-
प्राचीन भारतीय आर्य आषाएँ, मध्यकालीन भारतीय आर्य आषाएँ और उनके अंतरसंबंध, अपभ्रंश, अवहट्ट (पुरानी हिंदी) का संबंध, आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएँ और उनका वर्गीकरण, हिंदी का भौगोलिक विस्तार, आरंभिक हिंदी का व्याकरणिक तथा अनुप्रयुक्त रूप, हिंदी की उपभाषाएँ और बोलियाँ वर्गीकरण तथा क्षेत्र, प्रारंभिक हिंदी के विविध रूप- हिंदी. उर्दू, हिंदुस्तानी, दखिनी हिंदी: काव्यभाषा के रूप में अवधी का उदय और विकास, काव्यभाषा के रूप में ब्रजभाषा का उदय और विकास, साहित्यिक हिंदी के रूप में खड़ी बोली हिंदी का उदय और विकास
• मानक हिंदी का आषावैज्ञानिक विवरण (रूपगत) : हिंदी की स्वनिम व्यवस्था, हिंदी ध्वनियों के वर्गीकरण का आधार, हिंदी शब्द रचना उपसर्ग, प्रत्यय, हिंदी की रूप रचना लिंग, वचन, कारक व्यवस्था के संदर्भ में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया रूप, हिंदी वाक्य रचना
• हिंदी आषा प्रयोग के विविध रूप : बोली, मानकभाषा, राजभाषा, राष्ट्रभाषा, संपर्क भाषा, संचार आषा
• प्रयोजनमूलक हिन्दी की संवैधानिक स्थिति और भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी का विकास

2. नागरी लिपि का इतिहास विकास :
• नागरी लिपि की उत्पत्ति और विकास
• नागरी लिपि की विशेषताएं एवं मानकीकरण,
• कंप्यूटर और देवनागरी लिपि से संबंधित सुविधाएँ एवं सॉफ्टवेयर यूनिकोड

3. हिन्दी विस्तारीकरण के वैयक्तिक एवं संस्थागत प्रयास :
• स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का विकास,
• हिंदी प्रसार के आंदोलन, प्रमुख व्यक्तियों एवं संस्थाओं का योगदान,
• हिंदी से संबंधित सरकारी संस्थाएँ एवं विभाग,
• सम्मान
• पुरस्कार
• पत्र पत्रिकाएँ
• हिंदी के जनमाध्यम
• हिंदी पोर्टल एवं वेबपटल

4. हिंदी साहित्य का इतिहास :
• साहित्य का इतिहास दर्शन, हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की पद्धतियाँ, हिंदी साहित्य के प्रमुख इतिहास ग्रंथ एवं उनकी विशेषताएँ, हिंदी साहित्य इतिहास का काल विभाजन और नामकरण,
आदिकाल :-
आदिकालीन साहित्य की सामाजिक-सांस्कृतिक-धार्मिक पृष्ठभूमि, धार्मिक साहित्य- सिद्ध, जैन, नाथ साहित्य, लौकिक साहित्य- रासो काव्यधारा, श्रृंगारिक काव्यधारा, अमीर खुसरो की कविता
भक्ति काल :-
भक्ति आंदोलन की पृष्ठभूमि और इसके उदय के सामाजिक-सांस्कृतिक कारण विविध दृष्टि, भक्ति आंदोलन का अखिल भारतीय स्वरूप और इसकी अन्तः प्रादेशिक वैशिष्ट्य, अक्ति काव्य के प्रमुख दार्शनिक सिद्धांत – विशिष्टाद्वैत, शुद्ध द्वैत, द्वैताद्वैत, द्वैत मत, भक्ति काव्य काव्य परंपरा के अंतर, हिंदी की असूफ़ी प्रेमाख्यान
रीतिकाल :-
रीतिकाल की सामाजिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, रीतिकालीन साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियाँ, रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त काव्य, रीति काव्य के प्रमुख सोत, रीतिकालीन कवियों का आचार्यत्व, रीतिकाल के प्रमुख कवि और उनका काव्य, रीति काव्य में लोकजीवन, रीतिकाव्य का अस्मितामूलक विमर्श
आधुनिक काल :-
• हिंदी गद्य का उ‌द्भव और विकास, भारतेंदु पूर्व हिंदी गद्य, भारतेंदुकालीन हिंदी गद्य, भारतेंदु और उनका मंडल, भारतेंदु मंडल के बाहर के लेखक, पारसी थियेटर और हिंदी रंगमंच, हिंदी पत्रकारिता का आरंभ और 19वीं शताब्दी की हिंदी पत्रकारिता
• द्विवेदी युग: महावीर प्रसाद द्विवेदी और उनका युग, हिंदी नवजागरण और सरस्वती, राष्ट्रीय काव्य आंदोलन के प्रमुख कवि, स्वच्छंदवाद और उसके प्रमुख कवि, द्विवेदी युग की हिंदी पत्रकारिता, द्विवेदी युग की हिंदी गद्य विशेषताएँ
• छायावादः छायावाद की सांस्कृतिक-सामाजिक दार्शनिक पृष्ठभूमि, छायावाद का आरंभ, छायावाद के विषय में विभिन्न मत, छायावाद की प्रमुख विशेषताएँ, छायावाद के प्रमुख कवि,
• प्रगतिवाद की अवधारणा, प्रगतिवादी काव्य और उसके प्रमुख कवि
• प्रयोग और नई कविता: प्रमुख कवि
• समकालीन कविता

5. हिंदी साहित्य की गद्य विधाएँ :
हिंदी उपन्यास: उपन्यास की अवधारणा, प्रेमचंद पूर्व उपन्यास, प्रेमचंद और उनका युग, प्रेमचंद के परवर्ती उपन्यासकार, स्वातंत्र्योतर हिन्दी उपन्यास
हिंदी कहानी : हिंदी कहानी का उ‌द्भव और विकास, हिंदी कहानी के प्रमुख आंदोलन, कहानी और नई
कहानी, हिंदी कहानी की प्रमुख प्रवृतियां,
हिंदी नाटक: हिंदी नाटक और रंगमंच, भारतीय नाट्य परंपरा और नाट्यशास्त्र का संक्षिप्त परिचय, हिंदी नाटक के विकास के चरण, भारतेंदु युग पूर्व के नाटक, भारतेंदु युग के नाटक, प्रसाद युग और प्रसादोत्तर युग के नाटक, स्वातंत्र्योत्तर युग के नाटक, हिंदी एकांकी, हिंदी के प्रमुख एकांकीकार
हिंदी निबंध : हिन्दी निबंध का विकास, हिंदी निबंध की मूलभूत विशेषताएँ, हिन्दी निबंध के प्रमुख भेद,
हिन्दी के प्रमुख निबंधकार,
हिंदी आलोचना : हिंदी आलोचना का उ‌द्भव और विकास, हिंदी के प्रमुख आलोचक और आलोचनात्मक स्थापनाएँ
हिंदी की कथेतर गद्य विधाएँ: संस्मरण, रेखाचित्र, जीवनी, आत्मकथा, रेडियो एकांकी, डायरी, रिपोर्ताज, साक्षात्कार, यात्रा साहित्य, पत्र साहित्य, ब्लॉग लेखन (चिट्ठाकारिता)

6. साहित्यशास्त्र और आलोचना :
काव्यशास्त्र :-
• काव्य के लक्षण, काव्य प्रयोजन, काव्यहेतु, काव्य दोष, काव्य गुण, काव्य के रूप,
• काव्य के प्रमुख संप्रदाय और सिद्धांत: रस, अलंकारशास्त्र, अनुष्ठान, ध्वनि, अलंकारशास्त्र, औचित्य
• रस निष्पति, सामान्यीकरण, भरतमुनि का रस सूत्र और उसके प्रमुख व्याख्याकार, रस के घटक, मतभेद
• शब्द शक्तियाँ
• अलंकार, अलंकार, यमक, वक्रोक्ति, श्लेष, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, संदेह, भ्रांतिमान, अतिशयोक्ति, अन्योक्ति, समासोक्ति, अत्युक्ति, विशेषोक्ति, विभावना, प्रतीप, व्यतिरेक, अर्थन्तरन्यास, असंगति, विरोधाभास, तद्गुण, अतद्गुण, मिलित, उन्मीलित, अपन्न्हुती,
• प्लेटो के काव्य सिद्धांत
• अरस्तु की काव्य विषयक मान्यताएँ, त्रासदी के तत्व, अनुकरण सिद्धांत, विरेचन का सिद्धांत, त्रासदी और महाकाव्य में अंतर,
• होरेस: कविता के बारे में मान्यताएँ
• लॉजाइनसः काव्य में उदात्त तत्व
• शास्त्रीयतावाद और स्वच्छंदतावाद
• क्रोचे का अभिव्यंजनावाद
• आई. ए. रिचर्डस और टी. एस. इलियट के काव्य सिद्धांत
• नई समीक्षा

7. हिंदी आलोचना के पारिभाषिक शब्द और कतिपय अवधारणाएँ :
• काव्यभाषा, बिंब, मिथक, कल्पना, फैंटेसी, निजंधरी कथा, कविसमय, काव्यरूढि
• प्रतिभा, व्युत्पत्ति, अभ्यास, अनुभूति, अप्रस्तुत योजना, संकेत ग्रह, बिम्ब ग्रहण, आनंद की साधनावस्था और सिद्धावस्था, शिलादशा, भावदशा, लोकमंगल, प्रत्यक्ष रूपविधान, स्मृति रूपविधान, कल्पित रूपविधान, भाव और मनोविकार, ज्ञानात्मक संवेदना और सवेदनात्मक ज्ञान, लक्षणिक मूर्तिवत्ता, उपचार वक्रता, आदर्शोन्मुख यथार्थ, विरोद्धों का सामंजस्य, आघू मानव, मनौमयकोश, अलंबनत्व धर्म , अनुभूति, कल्पना, चेतना, प्रवाह, रूप, कथ्य, सहृदय,
• विडंबना (आयरोनी), अजनबीपन (एलियनेशन), विसंगति (एब्सर्ड), अंतर्विरोध (पैराडॉक्स), संत्रास, विरोधाभास, विपथन
• उत्तरआधुनिकता, मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद, यथार्थवाद, आदर्शवाद, अतियथार्थवाद, मानववाद, प्रभाववाद, आधुनिकतावाद, संरचनावाद, रुपवाद, अस्मितामूलक विमर्श (दलित, स्त्री, आदिवासी, थर्ड जेंडर)
• पुनर्जागरण, गांधीवाद, अंबेडकर दर्शन, लोहिया दर्शन, एकात्म मानववाद, सांस्कृतिक आलोचना
• हिंदी के प्रमुख आलोचक और उनकी आलोचनात्मक स्थापनाएँ

प्रमुख रचनाकार और रचनाएँ

8. हिंदी काव्य :
गौरखवाणी, संपादक पीतांबर दत्त बड़थ्वाल, पद संख्या 1, 6, 7, 9, 11, 12, 14, 15, 17, 28, 30, 32, 33, 36, 46, 51, 52, 54, 55, 57, 68, 69, 119, 123, 153
वि‌द्यापति : विद्यापति पदावली, संपादक रामफेर त्रिपाठी, पद संख्या 1, 2, 4, 6, 9, 10, 15, 20, 23, 33, 34, 36, 231, 239, 241, 251, 252, 254, 271, 274
कबीर: कबीर वाणी पीयूष, संपादक जयदेव सिंह, वासुदेव सिंह, सुमिरन को अंग, विरह को अंग, परचा को अंग, सहज को अंग, पद- 2, 3, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14.
जायसी : जायसी ग्रंथावली, संपादक रामचंद्र शुक्ल, नख-शिख खंड और नागमती वियोग खंड
सूरदास : भ्रमरगीत सार, संपादक रामचंद्र शुक्ल, पद संख्या 21 से 70 तक
तुलसीदास : रामचरितमानस उत्तरकांड, गीता प्रेस, गोरखपुर
मीराबाई : संपादक विश्वनाथ त्रिपाठी आरंभ के 20 पद
रहीम : रहीम रचनावली, संपादक सत्यप्रकाश मिश्र, दोहावली- 4, 13, 14, 16, 22, 23, 25, 27, 30, 31, 32, 35, 37, 40, 43, 44, 51, 63, 67, 72, 74, 75, 77, 89, 119, 124, 158, 168, 175, 209, 214, 219, 224, 225, 232, 239, 242, 243, 289, 290 (40 दोहे)
केशव : केशवदास – केशव कौमुदी, भाग 1, टीकाकार लाला भगवान दीन,
पांचवां प्रकाश श्लोक संख्या 10, 13, 14, 16, 17, 19, 22, 24, 31, 36, 38, 42, ग्यारहवां प्रकाश 17, 18, 26,
तेरहवाँ प्रकाश – 22, 53, 85, सोलहवाँ प्रकाश – 4, 6, 7, 11, 12, 13,
बिहारी: बिहारी, संपादक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, दोहा संख्या- 5, 8, 11, 21, 29, 33, 34, 37, 41, 43, 55, 84, 96, 111, 134, 163, 182, 185, 199, 213, 215, 224, 235, 347, 263, 265, 326, 358, 367, 390, 403, 409,436, 437, 440, 467, 525, 534, 539, 558 (40 दोहे)
भूषण : भूषण ग्रंथावली, संपादक विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, पद संख्या 50, 53, 55, 61, 62, 76, 78, 83, 92, 100, 274, 182, 195, 213, 231, 233, 323, 415, 420, 421 (20 श्लोक)
रसखानः रसखान रचनावली (सं० विद्यानिवास मिश्र, सत्यदेव मिश्र) सुजान रसखान सवैया 1, 2, 3, 5, 8, 12, 13, 18, 21, 27, 31, 32, 37, 41, 51, 53, 55, 56, 61, 63
घनानंद : घनानंद कवित (सं० विश्वनाथ प्र० मिश्र), कवित्त सं० 1 से 30 तक
मैथिलीशरण गुप्त : साकेत, नवम् सर्ग
जयशंकर प्रसाद: कामायनी आशा, श्रद्धा, लज्जा सर्ग
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला : राम की शक्ति पूजा, जागो फिर एक बार (भाग 2), भारती जय विजय करे, वर दे वीणावादनी वर दे
सुमित्रानंदन पंत : प्रथम रश्मि, नौका विहार, संध्या, एक तारा, भारत माता, दुत झरो जगत के जीर्ण पत्र
महादेवी वर्मा : दीपशिखा (दीप मेरे जल अकम्पित, पंथ रहने दो अपरिचित, मैं न यह पथ जानती थी, सब आँखों के आँसू उजले, सब के सपनों में सत्य पला), सांध्य गीत (मैं नीर अरी दुख की बदली, दीप तेरा दामिनी, देव अब वरदान कैसा)
सच्चिदानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ असाध्य वीणा, नदी के द्वीप
गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : अंधेरे में
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ रेणुका (हिमालय), सामधेनी (आग की भीख, दिल्ली और मास्को, जयप्रकाश, राही और बाँसुरी, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है. कलम आज उनकी जय बोल)
नागार्जुन : हज़ार हजार बाँहों वाली, अकाल और उसके बाद. गुलाबी चूड़ियाँ, बादल को घिरते देखा है, कालिदास
शमशेर बहादुर सिंह : भारत की आरती, एक पीली शाम, शाम होने को हुई, निराला के प्रति, एक नीला आइना बेठोस, दूब
केदारनाथ अग्रवाल : मेरी धरती और मैं, प्यासी धरती की पुकार, सुनता है बादल, जागरण की कामना, निराला के प्रति, माँझी न बजाओ बंशी, किसान से
भवानी प्रसाद मिश्र : गील फरोश, सतपुड़ा के जंगल
सुदामा पाण्डे ‘धूमिल’: मोचीराम, जनतंत्र के सूर्योदय में सच्ची बात

9. कथा साहित्य :

हिंदी उपन्यास :
प्रेमचंद गोदान
चतुरसेना शास्त्री: वयं रक्षामः
वृंदावनलाल वर्मा – विराटा की प‌द्मिनी
हजारी प्रसाद ‌द्विवेदी – पुनर्नवा
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेयः नदी के द्वीप
फणीश्वरनाथ रेणु, मैला आंचल
भगवती चरण वर्मा – भूले बिसरे चित्र
शिव प्रसाद सिंह नीला चाँद
अमृतलाल नागर – मानस का हंस
यशपाल – झूठा सच
श्रीलाल शुक्ल – राग दरबारी
भीष्म साहनीः वसंती
मन्जू भंडारी – आपका बंटी

कहानी :
प्रेमचंद – दुनिया का अनमोल रतन, कफन
राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह : कानों में कंगना
विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ : ताई
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी – उसने कहा था
जयशंकर प्रसाद – आकाशदीप
जैनेन्द्र – पत्नी
फणीश्वर नाथ रेणु’: लाल पान की बेगम, रसप्रिया
सच्चिदानंद वात्स्यायन अज्ञेय: रोज , शरणदाता
भीष्म साहनी: चीफ की दावत
उषा प्रियंवदा: वापसी
निर्मल वर्मा – परिंदे
कमलेश्वर : दिल्ली में एक मौत
राजेन्द्र यादव : जहाँ लक्ष्मी कैद है
मोहन राकेश : मलबे का मालिक

हिंदी नाटक :
भारतेंदु हरिश्चंद्र – अंधेरी नगरी
जयशंकर प्रसाद – चंद्रगुप्त
धर्मवीर भारती – अंधा युग
लक्ष्मीनारायण मिश्र – सिंदूर की होली
मोहन राकेश – आषाढ़ का एक दिन
उपेंद्रनाथ ‘अश्क’ – अंजो दीदी

10. कथेतर गद्य विधाएँ :

हिंदी निबंध :
भारतेंदु हरिश्चंद्र – भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है, वैष्णवता और भारतवर्ष
प्रताप नारायण मिश्र- आप, धोखा
बालकृष्ण भट्ट- साहित्य जन समूह के हृदय का विकास है
बालमुकुंद गुप्त – शिव शंभू के चिट्ठे
चंद्रधर शर्मा गुलेरी – धर्म और समाज
महावीर प्रसाद ‌द्विवेदी कवि कर्तव्य
सरदार पूर्ण सिंह – आचरण की सभ्यता
रामचन्द्र शुक्ल – श्रद्धा और भक्ति
हजारी प्रसाद ‌द्विवेदी : नाखून क्यों बढ़ते हैं
कुबेरनाथ राय – महाकवि की तर्जनी
विद्यानिवास मिश्रा – हिमालय जीवन की पुकार है
हरिशंकर परसाई – विकलांग श्रद्धा का दौर

आलोचना : प्रमुख आलोचक
रामचंद्र शुक्ल, नंददुलारे वाजपेयी, डॉ० नगेंद्र, हजारी प्रसाद ‌द्विवेदी, रामविलास शर्मा, विजयदेव
नारायण साही, रामस्वरूप चतुर्वेदी, नामवर सिंह की प्रमुख स्थापनाएँ

आत्मकथा :
पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र : अपनी खबर
जीवनी :
विष्णु प्रभाकर – आवारा मसीहा
संस्मरण :
विष्णुकान्त शास्त्री – सुधियों उस चन्दन के वन की
यात्रा साहित्य :
निर्मल वर्मा – चीड़ों पर चांदनी
रेखाचित्र :
महादेवी वर्मा मेरा परिवार
रिपोतार्ज :
फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ – ऋणजल धनजल
डायरी :
रमेशचन्द्र शाह : अकेला मेला
साक्षात्कार :
बनारसीदास चतुर्वेदी – प्रेमचंद के साथ दो दिन
पत्र साहित्य :
जानकी वल्लभ शास्त्री : निराला के पत्र
अमृत राय – चिट्ठी पत्री

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