
अमृता प्रीतम एक प्रसिद्ध भारतीय लेखिका, कवयित्री और उपन्यासकार थीं, जिन्हें पंजाबी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण आवाज़ों में से एक माना जाता है।
समस्त
परिचय
कविता
🌟 अमृता प्रीतम: जीवन और रचनात्मक परिचय
अमृता प्रीतम (1919-2005) पंजाबी और हिंदी की एक अग्रणी उपन्यासकार, निबंधकार और कवयित्री थीं, जिन्हें पंजाबी साहित्य की पहली प्रमुख महिला लेखिका माना जाता है।
🕊️ जीवन परिचय
जन्म: 31 अगस्त 1919 को गुजराँवाला (अविभाजित पंजाब, अब पाकिस्तान)।
प्रारंभिक जीवन: बचपन लाहौर में बीता। 16 साल की उम्र में उनका पहला कविता संग्रह ‘अमृत लहरें’ प्रकाशित हुआ।
विभाजन का दर्द: 1947 के भारत-पाक विभाजन की पीड़ा को उन्होंने अपनी अमर कविता “अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ” में अत्यंत भावनात्मकता से व्यक्त किया। विभाजन के बाद वह दिल्ली आ बसीं और हिंदी में भी लेखन किया।
निजी जीवन: उनके वैवाहिक जीवन में अलगाव के बाद उन्होंने प्रसिद्ध चित्रकार और लेखक इमरोज़ के साथ अपना शेष जीवन व्यतीत किया।
🖋️ रचनात्मक परिचय
विषय-वस्तु: अमृता प्रीतम का लेखन मुख्यतः नारी-जीवन, प्रेम, स्वतंत्रता, विभाजन की त्रासदी और सामाजिक कुरीतियों पर केंद्रित रहा। उनके लेखन में एक “आज़ाद रूह” (स्वतंत्र आत्मा) की झलक मिलती है।
प्रमुख कृतियाँ:
कविता: ‘सुनहेड़े’ (साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त), ‘कागज़ ते कैनवास’ (ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त), ‘मैं तुम्हें फिर मिलूँगी’।
उपन्यास: ‘पिंजर’ (विभाजन पर आधारित, जिस पर फ़िल्म बनी), ‘अदालत’, ‘कोरे कागज़’, ‘सागर और सीपियाँ’।
आत्मकथा: ‘रसीदी टिकट’।
सम्मान: उन्हें साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री (1969), ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982) और पद्म विभूषण (2005) सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी कृतियों का कई विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
अमृता प्रीतम की कविताएं
