शबरपा
सिद्ध शबरपा आदिकाल के चौरासी सिद्धों में से एक प्रमुख कवि थे, जो सरहपा के शिष्य और ‘चर्यापद’ नामक प्रसिद्ध गेय पदों के रचयिता थे।
सिद्ध शबरपा आदिकाल के चौरासी सिद्धों में से एक प्रमुख कवि थे, जो सरहपा के शिष्य और ‘चर्यापद’ नामक प्रसिद्ध गेय पदों के रचयिता थे।
सरहपा हिंदी के प्रथम कवि माने जाते हैं (राहुल सांकृत्यायन के अनुसार) और उनकी प्रसिद्ध रचना ‘दोहाकोश’ है, जिसमें उन्होंने बाह्याडंबरों का खंडन करते हुए सहज साधना पर बल दिया है।
मुनि रामसिंह आदिकाल के जैन कवि थे, जिनकी प्रमुख रचना ‘पाहुड़-दोहा’ विशुद्ध रहस्यवाद और आत्म-ज्ञान पर केंद्रित है।
छठी सती के कवि जोइंदु से दोहा छंद का आरंभ माना जाता है।
जोइंदु (योगीन्द्र) Read More »
वैचारिक पृष्ठभूमि भारतीय नवजागरण और स्वाधीनता आन्दोलन की वैचारिक पृष्ठभूमि हिन्दी नवजागरण । खड़ीबोली आन्दोलन। फोर्ट विलियम कॉलेज भारतेन्दु और हिन्दी नवजागरण, महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिन्दी नवजागरण गांधीवादी दर्शन अम्बेडकर दर्शन लोहिया दर्शन मार्क्सवाद, मनोविश्लेषणवाद, अस्तित्ववाद, उत्तर आधुनिकतावाद, अस्मितामूलक विमर्श (दलित, स्त्री, आदिवासी एवं अल्पसंख्यक) पृथ्वीराज रासो – रेवा तट अमीरखुसरो – खुसरों की
यूजीसी नेट (हिन्दी) पाठ्यक्रम की रचनाएँ Read More »