तुमसे मौजों से मरासिम नहीं जोड़े जाते
हम सफीनों से ये साहिल नहीं छोड़े जाते
मैं तेरे हाथ भला कैसे छोड़ सकता था
मुझसे जोड़े में लगे फल नहीं तोड़े जाते
रात ख़्वाबों में किसी बात पर तुझसे लड़ते
इतने थक जाते हैं बिस्तर नहीं मोड़े जाते
चोट लगती तुझे रस्ते में कहीं जाते हुए
और फिर हम तेरे ज़ख्मों पे निचोड़े जाते
संबंधित विषय – मानवता
