नामदेव ढसाल

गोलपीठा, महाराष्ट्र
1949 – 2014
mandev dhasal

नामदेव ढसाल एक प्रसिद्ध मराठी कवि, लेखक और दलित पैंथर आंदोलन के संस्थापकों में से एक थे।

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नामदेव ढसाल की सम्पूर्ण रचनाएँ

डॉ. नामदेव लक्ष्मण ढसाल (15 फ़रवरी 1949 – 15 जनवरी 2014) मराठी साहित्य के एक विद्रोही और जाज्वल्यमान नक्षत्र थे। वे मराठी कवि, लेखक, सामाजिक विचारक और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे।
उनका जीवन परिचय इस प्रकार है:

नामदेव ढसाल का जीवन परिचय

नाम – नामदेव लक्ष्मण ढसाल (Namdeo Laxman Dhasal)
जन्म – 15 फ़रवरी 1949
जन्म स्थान – पूरगाँव, जिला पुणे, महाराष्ट्र
पिता का नाम – लक्ष्मण ढसाल
निधन – 15 जनवरी 2014 (मुंबई, आंत के कैंसर से)
कार्यक्षेत्र – कवि, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, दलित पैंथर के संस्थापक
प्रमुख आंदोलन – ‘दलित पैंथर’ की स्थापना (1972)


प्रमुख बिंदु


1. प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

नामदेव ढसाल का जन्म पुणे जिले के एक दलित परिवार में हुआ था।
बचपन में ही वे अपने पिता के साथ बंबई (अब मुंबई) आ गए, जहाँ उनके पिता कत्लखाने में काम करते थे।
मुंबई के गोलपीठा (वेश्यावस्ती के निकट का इलाका) जैसे निम्न-वर्गीय और संघर्षपूर्ण माहौल में उनका जीवन बीता, जिसने उनकी कविता और सोच को गहरी दिशा दी।
उन्होंने औपचारिक शिक्षा के बाद जीवनयापन के लिए टैक्सी ड्राइवर के रूप में भी काम किया।

2. ‘दलित पैंथर’ की स्थापना (Dalit Panther)

1972 में, उन्होंने अपने समकालीन साहित्यकार मित्रों के साथ मिलकर महाराष्ट्र में ‘दलित पैंथर’ नामक एक क्रांतिकारी सामाजिक-राजनीतिक संगठन की स्थापना की।
यह संगठन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के विचारों से प्रेरित था और दलितों पर होने वाले अत्याचारों और जातीय वर्चस्व के खिलाफ एक आक्रामक और जुझारू आवाज़ बन कर उभरा।
इस आंदोलन ने मराठी साहित्य और महाराष्ट्र की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।

3. साहित्यिक योगदान

ढसाल मराठी दलित कविता के एक प्रमुख कवि थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं में हाशिए के समाज, शहर की गंदगी, भुखमरी, वेश्यावृति और जातिवाद के दर्द को अत्यंत बोल्ड और जीवंत भाषा में प्रस्तुत किया।
उनकी भाषा सीधी, अक्खड़ और महानगरीय बोली-भाषा से प्रभावित थी, जो पारंपरिक साहित्यिक मानकों को तोड़ती थी।
उन्हें भारतीय कविता का एक महान कवि माना जाता है, जिनकी कविताओं का अनुवाद कई यूरोपीय भाषाओं में भी हुआ है।

4. प्रमुख कृतियाँ

कविता संग्रह – गोलपीठा (1972), मूर्ख म्हाताऱ्याने (मूर्ख बूढ़े ने), तुही यत्ता कंचित (अब तो केवल कुछ बचा है), गांडू बगीचा (गे गार्डन –
उपन्यास – अमली किमानी, उजाडल आणि शंभर सूर्यां आणि शंभर चंद्र (उजाड़ और सौ सूर्य और सौ चंद्र)
अन्य – निबंधों और लेखों का संग्रह

5. सम्मान

महाराष्ट्र सरकार द्वारा साहित्य सेवा के लिए पुरस्कृत।
उनकी रचना ‘गोलपीठा’ के लिए उन्हें सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित।
नामदेव ढसाल को भारतीय साहित्य में विद्रोह, आक्रोश और दलित चेतना की मुखर अभिव्यक्ति के लिए हमेशा याद किया जाता है।

नामदेव ढसाल की कविताएं

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