अदरक

मैं धरती का सबसे ढुलमुल बाशिंदा हूँ
सब्जीवाले नोट भंजाने उछाल देंगे
काहिली इतनी कि फफूंद चबा जाएंगे
मुझे छीलते हुए हर बार अजीब लगेगा तुम्हें
 
बारीक़ थूरो—
दाँत में फँसा तो मुसीबत
मेरा नाम किसी पकवान में मत लो
मेरी तरकारी बनाकर मत उड़ाओ अपना मखौल
 
सिर्फ तब याद करना
जब डोलने लगे तबीयत
मेरा क्या है बूढ़े आदमी के हाथ–सा पड़ा रहूंगा चुपचाप
 
चाय बनने का इंतज़ार करता हुआ।


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