मैं ढूँढ रहा हूँ गाँवों की गलियों में
उस उत्तर आधुनिक समाज को
जो सिद्धांतों में पढ़ाए गये।
मैं ढूँढ़ रहा हूँ
उस आधुनिक समाज को
जो यंत्रों से संपन्न बताए गए।
उस देश में
जिसका गँवई आदमी
आज भी आदिमानवों की तरह
पूरा दिन बिताता है रोटी की तलाश में।
उस देश की किताबों में
जहाँ रोटी जुटाने के तरीके बताए जाने थे
उत्तर आधुनिकता के प्रभाव पढ़ाए जाते हैं
विश्वग्राम के सिद्धांत पढ़ाए जाते हैं
जहाँ कुछ गँवई साइकिल को ही मानते हैं
अपना सबसे उन्नत आधुनिक यंत्र।
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