आधा ‘प’
जिससे आरम्भ होता है
हमारी भाषा का सबसे मूल्यवान शब्द
सबसे समूचे अर्थ वाला
अधूरेपन से ही आरम्भ किया हमने-तुमने
आधा ‘प’ होना
हमारी ही सम्भावना है
कम्बख़्त कौन
होकर पूर्ण
होना चाहता है ब्रह्म?
स्रोत- ‘उदासी का ध्रुपद’ संग्रह से साभार अवनीश यादव द्वारा बहता नीर के लिए चयनित।
