जब-जब तू प्यास बनकर
मेरे प्राणों को आलोड़ित करता है
मैं भी
ह्रदय सिन्धु में
प्रार्थना की नाव से
आशा के पतवार लिए
श्रद्धा के दीप जला
तुम्हे ढूढ़ ही लेती हूँ
और हो जाती हूँ
अज्ञात
तुम्हारे साथ।
संबंधित विषय – आशा
जब-जब तू प्यास बनकर
मेरे प्राणों को आलोड़ित करता है
मैं भी
ह्रदय सिन्धु में
प्रार्थना की नाव से
आशा के पतवार लिए
श्रद्धा के दीप जला
तुम्हे ढूढ़ ही लेती हूँ
और हो जाती हूँ
अज्ञात
तुम्हारे साथ।
Excellent