उम्मीद एक ज़िद्दी बच्चे की तरह
मेरे साथ रहे
मैं अपने बूढ़े कन्धों को आजमाता रहूँ,
काँपती बाँहों से उसे
अपने कन्धों पर लेकर
तमाम अनजाने-
आपस में रगड़ खाते कन्धों से थोड़ा ऊपर
उचकाकर
दिखा सकूँ – कहीं दूर किसी पेड़ की
फुनगी पर फुदकती
चिड़ियों का अपना एकान्त
चिड़ियों का नाम वह पूछे
तो मनुहार करूँ-
रख दे वही उनका
कोई अपना-सा नाम!
स्रोत – ‘उदासी का ध्रुपद’ संग्रह से साभार अवनीश यादव द्वारा बहता नीर के लिए चयनित।
