अशीर्षक कविताएं

1

यायावरों का संग मधुर
पाँव का वो ताल मधुर
काल का श्रृंगार मधुर
निष्प्रयोजन प्रेम मधुर।

2

लिख-लिख कर थक गई
गीत गजल और कविता चाँद
तेरी दरश को ढूँढत अवसर
आँखन पड़ी हैं झांईं चाँद।

3

वो बिखर गया मैं सिमट गयी
गतिसीमा कब निर्बाध हुई
ये मिलन ह्रदय का अद्भुत था
मानो सिद्धि सी कोई साध हुई।

4

वो प्रेम में डूब जाये तो
शहर में ज़िक्र होता है
हम तो मीन है,
हमें कोई डूबा नहीं कहता।


5 1 vote
रेटिंग
guest
1 प्रतिक्रिया
Inline Feedbacks
View all comments
Sanjeev
Sanjeev

The poem written by the Author is indescribable

1
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x