1
यायावरों का संग मधुर
पाँव का वो ताल मधुर
काल का श्रृंगार मधुर
निष्प्रयोजन प्रेम मधुर।
2
लिख-लिख कर थक गई
गीत गजल और कविता चाँद
तेरी दरश को ढूँढत अवसर
आँखन पड़ी हैं झांईं चाँद।
3
वो बिखर गया मैं सिमट गयी
गतिसीमा कब निर्बाध हुई
ये मिलन ह्रदय का अद्भुत था
मानो सिद्धि सी कोई साध हुई।
4
वो प्रेम में डूब जाये तो
शहर में ज़िक्र होता है
हम तो मीन है,
हमें कोई डूबा नहीं कहता।
संबंधित विषय – प्रेम

The poem written by the Author is indescribable