बस इतना ही

इतनी सी शर्म बचा लेना चाहता हूं अपने भीतर 
दूध पिलाती स्त्री को देखकर निगाह नीची कर सकूं 


इतना निश्छल हो जाना चाहता हूं 
कि अगर गलती करूं 
तो माफी मांगने में संकोच न हो

इतना उपलब्ध हो जाना चाहता हूं
कि रोना चाहे कोई तो बेझिझक मुझ तक पहुंच जाए

इतना विस्तार चाहता हूं अपने भीतर
कि मेट्रो या बस में बैठते वक्त 
बगल में बैठी लड़की अपने में सिमटने लगे 
तो उठकर किसी दूसरी जगह पर बैठ जाऊं

इतनी गुंजाइश रखना चाहता हूं खुद में 
कि हार जाने पर जीतने वाले को बधाई दे सकूं 
किसी की खुशी में शामिल हो जाऊं और दुख में रो पड़ूं 
दोस्तों की तरक्की हो तो जल भुन न जाऊं 

ईमान में चाहता हूं बस इतनी सलाहियत 
कि पार्टी में शराब पीने वाले दोस्तों के साथ बैठा रहूं 
और बिना पिए उनके बहकने में शामिल हो जाऊं 

दरअसल इतना सरल हो जाना चाहता हूं 
कि कोई उतरे मुझमें तो उलझने की चिंता न करे


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