ख़ाली जगहें

आलमारी की जगह क़िताब भरती है
और कमरे की यादें

बगीचे पेड़ और फूल से भरते हैं
और धरती
रंग-बिरंगी तितलियों से

आसमान के ख़ालीपन को भरना पतंग के हवाले है
या उस चिड़िया के
जिसने अभी-अभी उड़ना सीखा है

सरकार के पास तो
ख़ाली जगहों के भरने का अपना तरीका है

संसद गुण्डों से भरी जाती है
और फाइलें अर्थहीन शब्दों के बोझ से
विश्वविद्यालय में ख़ाली जगहों पर चापलूस भरे जाते हैं
या महामूर्ख

अमूमन ख़ाली जगहें भर ही दी जाती हैं
अपनी नज़दीकी संभावनाओं से

पर कुछ जगहों का कोई स्थानापन्न नहीं होता
वो अंतहीन पीड़ा लिये ख़ाली ही रह जाती हैं
हमेशा के लिए…


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