पिता की कमीज़  

कमीज़ पुरानी थी 
उससे लगाव भी 
उतना ही पुराना 
जब भी उसे पहनता हूं 
महसूस होता है जैसे 
पिता की स्नेह भरी आंखें 
कहीं से निहार रहीं हैं मुझे 

पिता कहते थे कि 
उनके पिता ने उन्हें 
यह कमीज़ सौंपी थी 
इस कमीज़ को पहनकर उन्होंने 
बरसों कई मन बोझा ढोया है अपनी पीठ पर 
जाते हुए सौंप गए मुझे और अब 
मैं तुम्हें सौंपता हूं 

मैंने देखा है पिता की पीठ को 
जो वर्षों बोझा ढोने के बाद भी 
झुकी नहीं बल्कि तनी हुई थी
कमीज़ पहनने के बाद मै 
वही ऊष्मा अपने अंदर महसूस करता हूं 
उस वक्त कमीज़ का होना 
पिता के संग होने का एहसास दिलाती है।


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