सब लौटता है

जैसे रात के बाद लौटता है दिन
रवि के बाद सोम, आषाढ़ के बाद सावन
दुःख के बाद सुख या सुख के बाद दु:ख
वैसे नहीं लौटता है मान, अपमान
मान लौटता है मान की शक्ल में
अपमान लौटता है बनकर और वीभत्स

मृत्यु अमंगल नहीं है
यह लौटती है जीवन बनकर
मत समझो कि कोई चल जाता है
सदा- सर्वदा के लिए
जो गया है,वह निश्चित रूप से लौटेगा
यह दीगर बात है कि वह तुम्हें पहचान नहीं पाएगा
और तुम भी नहीं पहचान पाओगे उसे


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