तुम्हारा प्रेम

प्रेम-विहीन श्मशान में
अगर कुछ शाश्वत है

तो वो है…तुम्हारा प्रेम।

सुबह की नर्म दूब पर अलसाये ओस-कण
जो सूर्य-रश्मियों से लिपटकर उन्ही में विलीन होती है
उनके साथ वसुधा पर बरसने को

पुष्पों पर घुमड़ते पराग-कण…
पुष्प बन तेरे चरणों पर चढ़ने को आतुर

साँसों की गति मद्धम
तुम्हारे आराधन में

सभी चलता तेरे प्रेम में
तेरे प्रेम से…

तेरा प्रेम ही तुझको अर्पण
वही है मेरा तर्पण!


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Sanjeev
Sanjeev

HEART TOUCHING POEM

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