वंचना दार्शनिक बना सकती है
विद्वान नहीं
विद्वता सम्पन्नता से आती है
सम्पन्नता जाति से
मेरे पास भी है मेरी जाति
कहीं बीच में अटकी
आसमान से सबसे पहले टपकी
खजूर में लटकी
योग्यता की सीढ़ी को
औसतता के घुन खा रहे हैं
मैं चाहता हूं
वह उसे कुतर-कुतर कर खाएं।
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