युद्धानंतर

एक साया पैदा होगा और दो मुल्कों पर फैल जाएगा 
तोपों के मुहानों पर बांधी जाएंगी अस्मिताएं 
गोलियों से छलनी की जाएंगी नागरिकताएं
एटम बमों से उड़ा दिए जाएंगे विश्वास के पुल
मानवता को अभिशाप मिलेगा चुप रहने का
जगह जगह निकलेंगे जुलूस 
अभ्यास होंगे
हथियार होंगे 

हर रंग अंततः खून में बदल जाएगा
शोषक और शोषित की एक ही पहचान होगी
हत्या को एकमात्र धर्म घोषित किया जाएगा
हिंसा,भय,अविश्वास,अराजकता,चीत्कार 
इन सब पर भारी होगा राजा का जयगान 
जनगणमन को अधिनायक की जय करनी ही पड़ेगी

विमर्शों के स्वरूप बदल जाएंगे
बदल जाएगी संवेदना की परिभाषा 
स्त्रियां दूसरी स्त्रियों के बलात्कारियों की आरती उतारेंगी 
अल्पसंख्यक दूसरे अल्पसंख्यकों की हत्या पर अट्टहास करेंगे 
दलित नए अछूतों से नफरत करेंगे
आदिवासी मान लेंगे स्वयं को राष्ट्र का नागरिक 
और खुशी खुशी सौंप देंगे जल जंगल जमीन

लाशों के पंचनामे होंगे
गलियों में सन्नाटे होंगे
पूंजी के दलाल हथियारों की खरीद फरोख्त से हुए मुनाफे पर चर्चा करेंगे
शहादत पर श्रद्धा जांची जाएगी नागरिकों की
गली गली रख दिए जाएंगे दानपात्र

सवाल ठिकाने लगाए जाएंगे
आंसुओं की बोली लगेगी
गर्व की हुंकार से दबा दी जाएगी करुणा
आधुनिक मानकों पर ढूंढे जाएंगे देश के गद्दार
इन सबके बीच अचानक से प्रकट होगा राजा
धवलकेशी चेहरे पर खास भंगिमाओं के साथ
आवाज को जरूरी लचक देते हुए संबोधित करेगा
युद्ध समाप्त हुआ
देश सुरक्षित हाथों में है 


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