मॉक ड्रिल

मॉक ड्रिल हुई 
सायरन बजा
और हम छुप गए डेस्क के नीचे 
मेम ने कहा वार में बम गिरते हैं 
अपनी सेफ्टी करना सीखो बच्चों
स्कूल से मॉक ड्रिल करके लौटी बेटी ने जब कहा
-अब्बू डर लग रहा है
क्या वार होने वाला है 
सीने से लगाकर सिर्फ इतना कह पाया 
-बहादुर बच्चे डरते नहीं 
और गोद में लेकर लेट गया 
इस रटे रटाए जुमले से बेटी निर्भय हुई या नहीं 
मैं खुद जरूर कटघरे में था 
कि जिस वाक्य को 
दुनिया के हर बच्चे की प्यारी आंखों में झांककर
मुझे इस तरह कहना था
डरो नहीं बच्चों वार अब कभी नहीं होगा
वार अब कहीं नहीं होगा
उसी वाक्य को बदलकर
मैं अपनी ही बेटी से आँखें चुरा रहा था


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