आदमी पर निबंध

मैं गाय पर निबंध लिखकर बड़ा हुआ हूं
लिख सकता हूं स्वतंत्रता और समानता पर भी
पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग पर भी लिखवा सकते हो
महिला सशक्तिकरण तो पसंदीदा टॉपिक है

पर आदमी पर निबंध लिखना है खासा कठिन काम
खैर,शुरू करता हूं जैसे शुरू करता था गाय पर लिखना
लिखता हूं – आदमी के दो पैर होते हैं
होते हैं दो हाथ,दो आंखें ,दो कान
पर निश्चित नहीं होता उसका कोई आहार
वह कुछ भी खा सकता है

आदमी गाय की तरह नहीं रह सकता निर्वस्त्र
पर सभ्य परिधान में ही वह हो जाता है नग्न

गाय की तरह उसकी नहीं होती कोई निश्चित बोली
कभी सभ्य ढंग से तो कभी बोली की जगह
उसके मुंह  से निकलती है गोली

गाय का दूध लाभदायक होता है
पर आदमी की राय खतरनाक भी हो सकती है
शक्ल- सूरत देखकर उसे नहीं दिया जा सकता आदमी  होने का प्रमाण पत्र

अनेक सरकारी  पहचान पत्रों के बावजूद
निश्चित तौर पर उसे नहीं कहा जा सकता आदमी
पर वह इन्हें प्रस्तुत कर आपको कर सकता है लाजवाब

वह लेखक  है, पत्रकार है
बहुत बड़ा व्यवसायी, सेठ साहूकार भी
ऊंचे ओहदे पर बैठा वह चला रहा है हुकूमत मत भी
फिर भी यदि कोई कहे कि वह आदमी है
तब कुछ देर तक मैं ताकता रह जाता हूं
धीरे से निकलती है आवाज –
मैं इन्हें नहीं पहचानता।


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