अब उम्र हो रही है
घुटनों में जोड़े पडने लगी हैं
दर्द से कराह रही हूँ रात भर
आंखों की चमक धुंधली पड़ रही हैं
अब माथे पर झुर्रीयो की लकीरें दिखने लगी हैं
बता रहे हैं की उम्र हो चली है
कितना गजब का था यह सफर
क्या बयां करू
बाकी नहीं कुछ भी अब
बालों में सफेदी की परतें
मानो अनुभव की किताब लिख रही हों
उम्र तो सालों की किताब है
अब निशब्द हूँ
मौन में लीन हो रही है
शून्य
शून्य
शून्य …।
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