सुना है ! किसी भयंकर बाढ़ में बह गई थी
एक बेहद उन्नत प्राचीन सभ्यता
शायद, बाढ़ ही में डूब गई थी ‘शापित’ द्वारका
निश्चित ही बहुत उन्नत है हमारी सभ्यता
हर साल बाढ़ में बहने के बावजूद बची रह जाती है
ऐसा लगता है
नावें बचा लाती हैं हवा में उड़ान भरती सभ्यता को
हर साल डूबने से
निश्चित ही बड़े खुशहाल हैं हमारे लोग
और पूरी तरह संरक्षित हैं हमारे जीव जन्तु
तभी तो साल दर साल
तबाही के बाद भी बचे रह जाते हैं
बाढ़ के उतरने पर खोज निकालेंगे ये
कीचड़ में दबे
टूटे फूटे बर्तन, नागरिकता के दस्तावेज़
और, अपने परिजनों के शव
ऐसी आफ़त के समय
एक गैंडे और आदमी को साथ साथ
नाव से सुरक्षित स्थान पर जाता देख
मेरा यह विश्वास दृढ़ हुआ कि
इस देश को नागरिकता पंजीकरण की तत्काल आवश्यकता है
ढह गई छः मंज़िला इमारत एक
बह गई कुछ झुग्गियाँ
कल तक जो मकान मालिक थे
वे जो कल तक सड़क पर आना
अपना काम नहीं समझते थे
एकाएक सड़क पर आ गए आज वे
तंत्र के मलबे में अब भी दबे हैं कुछ जन
जल्द ही निकाल लिए जाएँगे उनके शव
और इस तरह समझ आया-
इस जनतंत्र को एक नए संसद भवन की तत्काल आवश्यकता है
महामारी ने अपने पैर पसारे
और अधिनायकवाद ने उसके कंधे की सवारी की
मर गए असंख्य जिन्हें ईश्वर पर थी अटूट आस्था
बच गए असंख्य जिन्हें ईश्वर पर ना थी कोई आस्था
कुछ बचते बचते मर गए
कुछ मरते मरते बच गए
किसी ने कहा –
अलाने ईश्वरीय कोप से मर गए
तो किसी और ने कहा –
फलाने ईश्वर की कृपा से बच गए
जो मर गए उनके परिजनों ने ईश्वर की शरण ली
जो बच गए उन्होंने ईश्वर का आभार प्रकट किया
और इस तरह मेरा यह विश्वास प्रबल हुआ-
हमारी आस्था को एक मंदिर की तत्काल आवश्यकता है
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