ईश्वर के जैसे 1 Comment / By / वसुंधरा पाण्डेय जिद उसकी आदत हैजायेगी नहीं?सृजनसामान्यों के वश में होता भी नहीसनकी होते हैं जिद्दीईश्वर के जैसे। अगली रचना – छू लो मुझे» «पिछली रचना – आप क्या जानो साहेब
बहुत-बहुत sunder likha gaya है