जीवन

जब मैंने पहली बार चोरी की और पकड़ा गया
मुझे मेरी ही चुप्पी पर आश्चर्य हुआ

जब मैंने दुःख की नदी में डूबते हुए बचाने की गुहार लगाई
सिर्फ़ मेरी ही आवाज़ ने मेरा हाथ थामा

जब मैंने अपना हाथ हवा में उछाला
मुझे दुनियावी असफलताओं ने ताना मारा

मैं तो मदमाते बसंत में बर्बाद हुआ
मुझे तो कुवार की बाढ़ ले डूबी


4.7 3 votes
रेटिंग
guest
0 प्रतिक्रियाएँ
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x