कहीं कोई नहीं था

लड़की के दुपट्टे पर  बैठ गया था
कोई कीड़ा
बीच रास्ते में न जाने कब

लड़की ने दुपट्टा ठीक करने के लिए 
हाथ लगाया और कीड़ा,
उफ़ ..

दुपट्टे को नीचे सड़क पर फेंक दिया 
माँ ने कीड़ा भी देखा, दुपट्टा भी 
पर गुस्से से लड़की को घूरा

राह चलते उस लड़के ने 
झुक कर उठाया दुपट्टा
और झाड़ कर थमा दिया
लड़की के हाथ में 
झुकी नज़र से देखा लड़की ने
और ..धंस गई ज़मीन में 
पता नहीं वो क्या भाव था 
पर दुपट्टा खींच कर 
भागने वालों को
कभी नहीं मिल सकता

चुपचाप पत्तल में एक की जगह
 दो पूरी डाल जो मुड़ गया 
बिना पीछे देखे 
उसकी पीठ बहुत कुछ कह देती है
सब कुछ कह देने वाले क्या जाने
यूँ सन्देश देना

ट्रेन में पहली बार चढ़ी लड़की 
उतरने की जल्दी में 
बढ़ती है बिना ट्रेन पूरी तरह रुके 
बढ़ कर बाँह थाम लेता है एक हाथ
मख़मली आवाज़ 
“सम्भल कर, अभी रुकी नहीं ट्रेन “
ट्रेन की धड़धड़ 
सीने में क्यों होने लगी !
पिता घूर कर देखते हैं 
दोनों को,
“तुम हटो ,
हम हैं साथ में”

ये सब याद करने की बात है क्या !

सब भूल जाती लड़की 
अगर ये प्रेम जीवन में मिल सकता

तरस गई …
जीवन बीतने को है ।
मन पर मनों मिट्टी के नीचे से
झाँकने लगा है
झिलमिल -झिलमिल
दृश्य 
प्रेम ऐसे ही टुकड़ों में मिलता है क्या ..

जान देने से कठिन है
इज़्ज़त देना 
लड़कियां जानती है 
मर जाती हैं 
इज़्ज़त देने वाले पर
मृत्यु शय्या पर पड़ी 
मौत से आँख मिचौली खेलती 
दादी से
पत्रकार बनी
ढीठ लड़की 
पूछती है प्रेम के बारे में

जीवन दिप दिप कर 
झिलमिलाने लगता है 
बूढ़ी आंखों में
कस कर आँख बंद कर 
कहती हैं  
कहीं कोई नहीं …

पर तुम प्यार का मौका  
मिले तो
कभी मत गवाना बेटी


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