खामोश कलम

लिखने को तो बहुत कुछ है,मेरे दोस्त
लेकिन मैं अब नहीं लिखता कविताएँ
गिरा देता हूँ दो बूँद आँसू
कलम तोड़ देता हूँ पन्नों पर
जबान काट ली गई है,मेरी
बोलता नही अब कुछ भी
सिर्फ देखता हूँ, तुम्हें तुम्हारी हत्या होते हुए
ये जानते हुए की देखना-
अपने समय की सबसे बड़ी त्रासदी है।
मुझे माफ करना दोस्त-
मेरे कलम और जबान पर बंदूक का पहरा है।


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