मां कहती थीं कि
इतनी दूर मत चले जाना
जहां से लौटना
मुश्किल हो और
लौटने में तुम्हारे पांव
घर का रास्ता भूलने लगे
मेरे घर से निकलने के देर बाद तक
वह उस रास्ते को निहारती रहती
और मेरे लौटने के इंतज़ार में वहां खड़ी रहती
मेरे जाने और जाकर लौट आने के बीच
जाने क्या सब सोचती
वह रास्ते को एकटक निहारती रहती
मुझे आते देखकर खुशी से उनकी आंखें छलक जाती
यहां शहर आकर,शहर की गलियों में
कुछ इस तरह से खो गया हूं कि
अब वो रास्ता ही भूल गया हूं
जो मां की आंखों से होकर गुजरता था।
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