आंखों में समुद्र 

तुम्हें 
स्वाद की चिंता थी 
और मुझे 
नमक की 
जो मेरे रोकने के बावजूद भी 
पलकों का द्वार खोल कर 
अनायास ही छलक कर 
गीली कर जाती है 
 रोटियों को 
और रोटी का स्वाद
नमकीन हो जाता है 

जानती हूं कि 
आंसू के संग बहे
इस नमक का
कोई मोल नहीं है 
तुम्हारी नज़रों में 
समुद्र की तरह ही 
अथाह और नमकीन है 
आंखों का यह पानी भी


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