पैमाना

साँस कब से ले रहा हूँ 
इसका पैमाना मेरी उम्र है।

जीना कब शुरू किया
 या कब शुरू कर पाऊँगा
 इसका पता कौन देगा।

मेरी लम्बाई क्या है
मेरा वज़न क्या है 
इसकी नाप-जोख में तो 
बहुतों की मदद ले सकता हूँ 
पर अपनी निगाह में ख़ुद अपने को नाप सकूँ 
इसका पैमाना कहाँ से पाऊँ 
नाप-जोख की इस दुनिया में।


स्रोत- ‘उदासी का ध्रुपद’ संग्रह से साभार अवनीश यादव द्वारा बहता नीर के लिए चयनित।

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