प्रेम की भाषा 

ठंड से ठिठुरते हुए हाथों पर 
उसने रख दी है अपनी गर्म हथेलियां 
ये वही हाथ हैं जो अभी – अभी 
चूल्हे की आग पर सेंक रहे थे रोटियां 
उसकी हथेलियों से 
रोटी की सोंधी महक आ रही थी 
वह पढ़ना नहीं जानती है पर 
उसे भाषा आती है 
मेरी हथेलियों पर 
उसने रख दी है 
गरम रोटियां ..


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