दोराहे पर खड़ा हूं
दोनों रास्ते अलग-अलग दिशाओं में खुलते हैं
एक रास्ता ले जाता है
गुलाबों के बाग की तरफ़
दूसरा छितवन की कतारों की तरफ़
दिमाग़ कह रहा है कि
गुलाबों के बाग की तरफ़ जाओ
दिल कह रहा है कि
छितवन की कतारों की तरफ़
मैं चाहता हूं
दोनों को धता बताकर
बढ़ जाऊं उस तरफ
जो संगम की ओर जाता है।
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