रीत जाना था

मैनें अपने विचारों का अश्व दौड़ाकर
कुछ ताज़ी उम्मीदों को फहराकर
खुली वायु, स्वछंद आकाश में
अपनी कामनाओं के किंचित विकाश में
मुक्ति चाहा था

बंदिशों के विरुद्ध
जीवन की सूक्ति चाहा है
और मुझे अनायास ही
बेड़ियों मे जकड़ लिया गया
अपना इच्छित संवाद करते हुए
अपराध में पकड़ लिया गया

अपने अधिकार का कोरस करते
भूख की याचना करते
अपने ईमानदर श्रम का दम्भ भरते
मेरी रुमानियत भरी सुवह में
षडयंत्र की कीलों में जड़ दिया गया

मेरा उद्देश्य वेदना के गीत गाना नहीं
बल्कि
आगामी प्रभात की किरणों मे
रीत जाना है


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