धर्म का संज्ञा भेद

धर्म शब्द से भीड़ की गंध आती है
जाति की भी
और आजकल धर्म सुनकर लगता है
वे हमारे प्रधान या स्वयं राम हों
 
कैसे बोल दूँ भरी कक्षा में झूठ
कि धर्म भाववाचक संज्ञा है
बच्चे ने पूछा था हाथ उठाकर सवाल
वह मेरे जवाब का इंतज़ार कर रहा था
मैं घंटी बजने का। 


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