ख़ून से सना बस्ता

(28 फरवरी 2026 को दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में शजारेह तैय्येबेह गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर अमेरिकी सेना द्वारा किए गए मिसाइल हमले में जो लोग मारे गये उनमें ज्यादातर मासूम स्कूली बच्चियां थीं। यह कविता उसी घटना से प्रेरित है) 

स्कूल मुझे बचपन से ही ज्यादा अच्छा लगता था 
ज्यादा अच्छा इसलिए कि नई किताबें और बस्ता मिलता था
नई कक्षा में भी पुराने फटे बस्ते पर ज़ार-ज़ार रोती थी 
फिर जल्दी ही मान जाती थी
लेकिन नया बस्ता पाने की लालसा कभी ख़त्म नहीं हुई 

मैं बस्ते में अपनी कीमती नई किताबें रखती
और रात में सोते हुए उनके सपने देखती
मेरा बस्ता रात में किताबों की रोशनी से चमकता 
मैं उस रोशनी में अपना रास्ता ढूंढती
और रास्ता मिल ही जाता था
फिर किताबें बस्ते में रखकर 
अगले साल किसी दूसरे बच्चे को दें दी जातीं 
और वह बच्चा भी अपना रास्ता ढूंढ लेता…

स्कूल के बस्ते में हम- 
बस किताबें और नोटबुक नहीं रखते थे 
बल्कि आधी छीली पेंसिल, उसका छिलका, टूटी हुई रबर और कटर भी रखते
रखते थे छुपकर खाई इमली के बीज और पचास पैसे का सिक्का 
और रख लेती थी रास्ते से गुजरते हुए कदम्ब का पका पीला फल- 
सबसे छुपकर खाने के लिए
अपनी पुस्तक-कला  में बनाई मिट्टी के रंगे हुए सब्जी-फल भी रखती थी
माँ के हाथ की बनी हुई रोटी और अचार भी रखती थी
कोई फूल, पत्ती, घास, पत्थर और रास्ते में पड़ी कोई सुंदर वस्तु भी अपने बस्ते में रख लेती 
बस्ता मेरा पसंदीदा था, पुराना ही सही, था तो मेरा
वह मेरी पसंद और सपने का पूरा ख़याल रखता था…

इतनी चीजों से भरा मेरा बस्ता कभी भारी नहीं लगा
क्योंकि उसमें सपनों के पर लगे थे
जिसे कंधे पर रख मैं उड़ने लगती 
मेरे बस्ते में माँ का सुकून था 
और पिता का प्यार! 

लेकिन बच्चों का वह प्यारा बस्ता
एक दिन खून से सना सड़क पर मिला
एक भयानक आततायी दुनिया का क्रूर सत्य था वह
सपना, सुकून और प्यार की एक साथ हत्या कर दी गई थी 
बस्ता पहाड़ की तरह भारी हो वहीं जम गया था
क्या शिक्षा इतनी बुरी होती है कि
गुस्सा, घृणा और हिंसा के आगे छोटी लगने लगे
और हमारा कद उससे बड़ा?

कितनी अजीब बात है- 
कि जिन किताबों ने हमें हिम्मत दी
आज उन्हीं किताबों से डर लग रहा है
और उस बस्ते से भी जिसमें वे रखी गईं हैं… 
माएँ डर रही हैं, 
पिता डर रहे हैं, 
डर रहे हैं दहशतगर्दी और आतंकवाद से
जिसके ख़िलाफ़ हमारी किताबें और बस्ते हैं… 

ओह, मेरी प्यारी बच्ची! मुझे माफ़ कर दो!
तुम्हारे सवालों के जवाब कैसे दूँगी?
सबसे अधिक पढ़े-लिखे राष्ट्र ने तुम्हारे बस्ते छीन लिए!!! 
लेकिन तुम्हारे हौसले नहीं छीन पायेंगे कभी… 
यकीनन!!! 


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