संवाद की भाषा 

हवा बही और पत्तियाँ हिलने लगीं
बारिश में धरती जी भर नहाई
एक अंधेरे कोने को धूप ने छू लिया
फ़रवरी जल्दी चली गई
लड़की के हाथ में मेंहदी खूब रची
आज गमले में एक फूल खिला
बन्द पड़े घर का दरवाज़ा खुला
कई दिनों बाद दोनों ने एक-दूसरे को देखा
उसने अपना गरम हाथ उसके ठण्डे हाथ पर रखा

स्थिर कुछ भी नहीं था…
क्योंकि-
भाषा के मौन हो जाने पर,
‘क्रियाएँ’-
‘संवाद की भाषा’ होती हैं!


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