जिस तरह घुलता है पानी में नमक
घुल गया अपनी कहानी में नमक
दुख ने मेरे होंठ चूमे एक दिन
भर गया तिश्ना दहानी में नमक
एक दिन चुप-चाप से गल जाएंगे
जम्अ करते हैं जवानी में नमक
बर्फ़ की दरकार थी इस घाव पर
आप लाए बद-गुमानी में नमक
ज़ीस्त का दामन भी खारा हो गया
इतना था उस दास्तानी में नमक
आपने नाहक मुझे आवाज़ दी
देखिये अब शेर-ख़्वानी में नमक
