आगे बढ़ी तो
और आगे जाने का ख़्याल आया
फिर एक दिन अचानक
लक्ष्मण-रेखा पार करने का ख़्याल आया
और उससे पहले
उसके परिणाम का ख़्याल आया
घर के भीतर हाथ पसारने की प्रथा थी
और उसके बाहर पैर पसारने की!
घर के भीतर
सहनशीलता का पाठ पढ़ाया गया
और ये भी कि
समाज में जीने की खातिर
समाज के बनाये नियमों पर
हस्ताक्षर करना होगा
समाज में
मुंह उजागर करने कि बातें सिखायी गयी
और शायद उसके बाहर
सशक्ता और सतर्कता सिखाई जाती
और शायद ये भी कि समाज में
न केवल अपना मुंह उजागर किया जा सकता है
बल्कि पूरी दुनिया में
समाज को उजागर करके
पूरी कहानी ही बदली जा सकती है
अक्ल आते-आते लगा कि
करने और न करने की
इस सोच के बीच
मैं सहनशीलता को पीठ पे लादे
और सशक्तता का हाथ थामे
पूरी पृथ्वी नाप कर आ सकती थी
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