सोने का पिंजरा

ऑंगन में उतरते ही 
उसे बताया गया था 
कि स्त्रियाँ
पर्दे की चीज़ होती हैं
घर से बाहर जाना
उनके लिए खतरे से खाली नहीं

उनसे कहा गया-
सूरज सिर पर 
चढ़ आता है
कोई दिक्कत नहीं
तुम आराम से जगना

उसे रोज याद दिलाया जाता है
कबर्ड में सजी
बनारसी,
कांजीवरम, 
ताॅंत और 
पेपर सिल्क की 
महँगी साड़ियाँ
यही सब बनी है तुम्हारें लिए

ये लो!
दो सौ ग्राम सोने से बने
कंगन, 
हार और झुमका
ये रही तुम्हारी 
बीस भर चाँदी की 
पायल और बिछुआ,
जो सबके नसीब में नहीं होते
इसे पहनो!

गहनों से लदी, 
सजी-सँवरी स्त्रियाँ
ज्यादा खूबसूरत लगती हैं

जब भी बीमार पड़ी
एक पग भी चलने की 
नहीं पड़ी जरूरत
एक फ़ोन कॉल पर डॉक्टर 
घर तक चले आए इलाज करने

नौकर, चाकर समय- समय 
पर देते रहते हैं
दवा और पानी!

इतना सुख है उसे
उसकी ससुराल में!

लेकिन फिर भी 
न जाने क्यों!
दिन भर खाकर,
अधमरी- सी लेटी रहती है पलंग पर।


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