भारी चीजें बोझ की तरह होती हैं
हम जितना रखेंगे अपने पास
उतना ही हमें जकड़ेगीं
इसलिए उन्हें
साँप की केचुली की तरह उतार देना!
दर्द थोड़ा कम होगा!
दर्द कभी भी पूरा नहीं जाता
इसका दावा भी बेकार है
इसलिए जब लगे कि अब नहीं
छोड़ देना या छूट जाना
कि जीवन कोई उधार नहीं!
तुम अपने होने को
उतना समझना
जितना दाल में
नमक का होना
दुनिया को कसकर
मत पकड़ना मुठ्ठी में
क्योंकि वक्त
रेत की तरह फिसलेगा
और तुम मौन दृष्टा होगे!
तुम्हें क्यों समझाना
इनको, उनको, सबको
खुद को बस समझ लेना
इतना ही काफी है
तुम्हें भार नहीं बनना
जब लगे; जोर से हँसना और
एकदम ही चुप हो जाना
बस मस्तिष्क का बोझ
अपनी देह और मन को मत देना!
‘प्यास’-एक कामना
नमक और मिठास का संतुलन
बस जीवन जीने का नाम है
पानी- प्रकृति का सहचर
अभी आँसूओं में वज़न बहुत है
चलो, बह चले उसके साथ!
उष्ण- शीतल, शीतल- उष्ण
शांत! शांत! शांत!
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