जहाँ पैदा होने पर
कोई सोहर गाने की परंपरा नहीं थी
फिर भी सोहर गाया गया
चावल बाँटे गये
बड़े बुजुर्गों से आशीष मिला
सुंदरता की बलाएँ ली गईं
साक्षात लक्ष्मी का वास माना गया
उसका आना कोई साधारण घटना नहीं थी!
वह पिता के साथ भोजन करती
भाईयों के साथ ताश-कबड्डी खेलती
गाँव के विद्यालय में सबसे पहली साइकिल उसने चलाई
उसके कहने से पहले ही उसकी पसंद की चीजें आ जाती
उसकी हर फरमाईश मान ली जाती
उसके आँसू कभी गिरने ही नहीं दिये गये
उसकी शिकायत भला कौन कर सकता था?
वह मनमौजी, अल्हड़ हवा की तरह बहती
वह बड़ी हो गई! समझदार हो गई!
वह एक सुंदर युवा से मिली
समानता, स्वतंत्रता और विश्व बंधुत्व उसकी आवाज़ थी
वह तो स्वयं इन्हीं मूल्यों के साथ बड़ी हुई थी
विचार और विचारधारा मिली
हृदय का कोई सूत्र उनसे जुड़ा
नाम में बड़े फासले थे
संस्कृति-संस्कार एकदम विपरीत
जैसे गंगा-जमुनी तहज़ीब
उनका जुड़ना कोई साधारण घटना नहीं थी!
वह खुश्बू की तरह मिले
आजाद पंक्षी की तरह उड़े
लेकिन अचानक कड़की बिजली
और वे सहम गये
किन्तु डटकर रहे साथ
बूँद बने और जमकर बरसे
चाहे आये तूफ़ान, चाहे आये बाढ़
उनका एक होना कोई साधारण घटना नहीं थी!
उसने पहली बार महसूस किया कि-
‘प्रेम’ एक अभिशाप है
तब तो और जब गै़र-जाति और धर्म में हो
पहली बार छल महसूस किया-
आज़ाद बचपन की आज़ादी से
पहली बार ही समझ में आया-
कि आज़ादी की कीमत होती है
पहली बार ‘कैद की राजनीति’ समझ आयी
पहली बार ही समझ आया-
कि घर की स्त्रियाँ हमेशा मौन क्यों रहतीं हैं
पहली बार ही आज़ादी का मतलब कर्ज बताया गया
पहली बार ही परिवार की शुद्धता की बात याद दिलाई गई
पहली बार ही सारे संबंध तोड़ लिए गये
पहली बार ही शत्रुता का बोध कराया गया
और इस प्रकार-
पहली बार ही प्रेम की कीमत लगाई जाती है
और किया जाता है- ‘ऑनर कीलिंग’
जैसे कुटिलों द्वारा प्रेम से खिला-पिलाकर दिया जाता है एक बकरे की बलि
उसकी भी चढ़ा दी गई है बलि-
सम्मान की खातिर बिना अपराधबोध के
लेकिन यह एक साधारण घटना है-
रोज घट रही है!!
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