बारिश के बाद

भीगे चेहरे से पता चलता है कि 
बारिश हुई है तो
उसका असर कहां कहां हुआ है
मलिन आंखों की चमक 
थोड़ी खुल गई
आंखों के नीचे का घेरा 
कुछ सुस्त पड़ गया
बालों से टपकती बूंदें 
खोजती हैं हवा सूखने के लिए
देह में जहां जहां दुःख है 
वहां वहां पानी चमक रहा है
सबकुछ को बहाकर जैसे 
चमक जाती है सड़क
वैसे ही मन चमक जाता है 
थोड़ी देर के लिए ही सही

पेड़ों को तो इंतजार की आदत है
वे धूल को लबादे की तरह ओढ़ते हैं
सिर्फ इसलिए कि 
एक दिन बारिश आएगी और नहा देगी
पक्षी की आदत है कि 
जब बरसता है पानी तो
वे चक्कर काटते हैं गोल घूमते हुए
बीज को नमी चाहिए तो 
वे अपनी खाली थाली लेकर
इंतजार में रहते हैं कि 
कब भरे बूंदें
कब गिरे बादल और थाली को कंठ तक भर दे

पानी की भूख सबको है
पानी की प्यास है सबकी एक जैसी
इसीलिए जब आसमान में 
तंबू तानते हैं बादल तो
चमक जाती हैं छोटी बड़ी सबकी आंखें

बारिश के पहले का समय 
बदल जाता है बारिश के बाद
बारिश के बाद बदल जाती है दुनिया
दुनिया बदलने के लिए होती है बारिश


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