छिपे हुए प्रेम की तरह

जिन पुरुषों ने पाये स्त्रियों जैसे हृदय 
कच्ची उम्र में प्रेम में पड़ गये 

उनका प्रेम अपने भीतर छिपी 
उस स्त्री की खोज थी 
जिसके हृदय से एकसार थे 
उनके हृदय 

वह स्त्री बाहर कहीं नहीं मिली 
फिर वे कवि बन गये 

दुनिया के अधिकांश कवि 
थके-हारे असफल प्रेमी हैं 
जो आज भी ढूँढ़ रहे हैं 
भीतर छिपी स्त्री 

वे अच्छी तरह जानते हैं 
कि जिसे ढूँढ़ रहे बाहर
कभी नहीं मिलने वाली 

वह 
अपने ही भीतर है 
छिपे हुए प्रेम की तरह 


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